इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
भजन संहिता 129
सिय्योन के शत्रुओं पर विजय का गीत
यात्रा का गीत
इस्राएल अब यह कहे,
“मेरे बचपन से लोग मुझे बार बार क्लेश देते आए हैं,
मेरे बचपन से वे मुझ को बार बार क्लेश देते तो आए हैं,
परन्तु मुझ पर प्रबल नहीं हुए।
हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया1,
और लम्बी-लम्बी रेखाएँ की।”
यहोवा धर्मी है;
उसने दुष्टों के फंदों को काट डाला है;
जितने सिय्योन से बैर रखते हैं,
वे सब लज्जित हों, और पराजित होकर पीछे हट जाए!
वे छत पर की घास के समान हों,
जो बढ़ने से पहले सूख जाती है;
जिससे कोई लवनेवाला अपनी मुट्ठी नहीं भरता2,
न पूलियों का कोई बाँधनेवाला अपनी अँकवार भर पाता है,
और न आने-जानेवाले यह कहते हैं,
“यहोवा की आशीष तुम पर होवे!
हम तुम को यहोवा के नाम से आशीर्वाद देते हैं!”
Source notes (2)
- Footnote हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया: यह रूपक ही भूमि जोतने का है उसमें निहित विचार यह है कि कष्ट ऐसे हैं जैसे हल धरती का सीना चीरता है।
- Footnote जिससे कोई लवनेवाला अपनी मुट्ठी नहीं भरता: वह एकत्र करके मवेशियों के लिए नहीं रखी जाती जैसे मैदान की घास। ऐसे किसी काम के लिए वह व्यर्थ है या वह पूर्णतः निकम्मी है।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
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