इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
अय्यूब 29
अय्यूब के अंतिम वचन
अय्यूब ने और भी अपनी गूढ़ बात उठाई और कहा,
“भला होता, कि मेरी दशा बीते हुए महीनों की सी होती,
जिन दिनों में परमेश्वर मेरी रक्षा करता था,
जब उसके दीपक का प्रकाश मेरे सिर पर रहता था,
और उससे उजियाला पाकर1 मैं अंधेरे से होकर चलता था।
वे तो मेरी जवानी के दिन थे,
जब परमेश्वर की मित्रता मेरे डेरे पर प्रगट होती थी।
उस समय तक तो सर्वशक्तिमान परमेश्वर मेरे संग रहता था,
और मेरे बच्चे मेरे चारों ओर रहते थे।
तब मैं अपने पैरों को मलाई से धोता था और
मेरे पास की चट्टानों से तेल की धाराएँ बहा करती थीं।
जब-जब मैं नगर के फाटक की ओर चलकर खुले स्थान में
अपने बैठने का स्थान तैयार करता था,
तब-तब जवान मुझे देखकर छिप जाते,
और पुरनिये उठकर खड़े हो जाते थे।
हाकिम लोग भी बोलने से रुक जाते,
और हाथ से मुँह मूँदे रहते थे।
प्रधान लोग चुप रहते थे
और उनकी जीभ तालू से सट जाती थी।
क्योंकि जब कोई मेरा समाचार सुनता, तब वह मुझे धन्य कहता था,
और जब कोई मुझे देखता, तब मेरे विषय साक्षी देता था;
क्योंकि मैं दुहाई देनेवाले दीन जन को,
और असहाय अनाथ को भी छुड़ाता था2।
जो नाश होने पर था मुझे आशीर्वाद देता था,
और मेरे कारण विधवा आनन्द के मारे गाती थी।
मैं धार्मिकता को पहने रहा, और वह मुझे ढांके रहा;
मेरा न्याय का काम मेरे लिये बागे और सुन्दर पगड़ी का काम देता था।
मैं अंधों के लिये आँखें,
और लँगड़ों के लिये पाँव ठहरता था।
दरिद्र लोगों का मैं पिता ठहरता था,
और जो मेरी पहचान का न था उसके मुकद्दमे का हाल मैं पूछताछ करके जान लेता था।
मैं कुटिल मनुष्यों की डाढ़ें तोड़ डालता,
और उनका शिकार उनके मुँह से छीनकर बचा लेता था।
तब मैं सोचता था, ‘मेरे दिन रेतकणों के समान अनगिनत होंगे,
और अपने ही बसेरे में मेरा प्राण छूटेगा।
मेरी जड़ जल की ओर फैली,
और मेरी डाली पर ओस रात भर पड़ी रहेगी,
मेरी महिमा ज्यों की त्यों बनी रहेगी,
और मेरा धनुष मेरे हाथ में सदा नया होता जाएगा।
“लोग मेरी ही ओर कान लगाकर ठहरे रहते थे
और मेरी सम्मति सुनकर चुप रहते थे।
जब मैं बोल चुकता था, तब वे और कुछ न बोलते थे,
मेरी बातें उन पर मेंह के सामान बरसा करती थीं।
जैसे लोग बरसात की, वैसे ही मेरी भी बाट देखते थे3;
और जैसे बरसात के अन्त की वर्षा के लिये वैसे ही वे मुँह पसारे रहते थे।
जब उनको कुछ आशा न रहती थी तब मैं हँसकर उनको प्रसन्न करता था;
और कोई मेरे मुँह को बिगाड़ न सकता था।
मैं उनका मार्ग चुन लेता, और उनमें मुख्य ठहरकर बैठा करता था,
और जैसा सेना में राजा या विलाप करनेवालों
के बीच शान्तिदाता, वैसा ही मैं रहता था।
Source notes (3)
- Footnote उससे उजियाला पाकर: उसके मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देशक में
- Footnote असहाय अनाथ को भी छुड़ाता था: अर्थात् किसी दरिद्र जन के पास वकील करने का साधन न हो और वह उसके पास अपना मुकद्दमा लेकर आया तो उसने उसे उसके शोषण कर्ता से मुक्ति दिलाई।
- Footnote जैसे लोग बरसात की, वैसे ही मेरी भी बाट देखते थे: अर्थात् जैसे सूखी और प्यासी भूमि वर्षा की प्रतिक्षा करती है।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
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