इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
अय्यूब 26
अय्यूब का उत्तर
तब अय्यूब ने कहा,
“निर्बल जन की तूने क्या ही बड़ी सहायता की,
और जिसकी बाँह में सामर्थ्य नहीं, उसको तूने कैसे सम्भाला है?
निर्बुद्धि मनुष्य को तूने क्या ही अच्छी सम्मति दी,
और अपनी खरी बुद्धि कैसी भली भाँति प्रगट की है?
तूने किसके हित के लिये बातें कही?
और किसके मन की बातें तेरे मुँह से निकलीं?”
“बहुत दिन के मरे हुए लोग भी
जलनिधि और उसके निवासियों के तले तड़पते हैं।
अधोलोक उसके सामने उघड़ा रहता है,
और विनाश का स्थान ढँप नहीं सकता। (भज. 139:8-11 नीति. 15:11, इब्रा. 4:13)
वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है,
और बिना टेक पृथ्वी को लटकाए रखता है।
वह जल को अपनी काली घटाओं में बाँध रखता1,
और बादल उसके बोझ से नहीं फटता।
वह अपने सिंहासन के सामने बादल फैलाकर
चाँद को छिपाए रखता है।
उजियाले और अंधियारे के बीच जहाँ सीमा बंधी है,
वहाँ तक उसने जलनिधि का सीमा ठहरा रखी है।
उसकी घुड़की से
आकाश के खम्भे थरथराते और चकित होते हैं।
वह अपने बल से समुद्र को शान्त,
और अपनी बुद्धि से रहब को छेद देता है।
उसकी आत्मा से आकाशमण्डल स्वच्छ हो जाता है,
वह अपने हाथ से वेग से भागनेवाले नाग को मार देता है।
देखो, ये तो उसकी गति के किनारे ही हैं;
और उसकी आहट फुसफुसाहट ही सी तो सुन पड़ती है,
फिर उसके पराक्रम के गरजने का भेद कौन समझ सकता है?”
Source notes (1)
- Footnote वह जल को अपनी काली घटाओं में बाँध रखता: बादलों में पानी ऐसा रहता है जैसे बंधा है जब तक कि परमेश्वर उसे बूँदों के रूप में पृथ्वी पर न बरसाएँ।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
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