याकूब
James
Introduction from this edition
याकूब की चिट्ठी
याकूब की चिट्ठी
परिचय
याकूब की किताब याकूब नाओं के कोई आदमी के जरिया लिखी गई रहै। जौ हुई सकथै: ईसु को भईय्या याकूब रहै, जो सुरु की कलीसिया मैं एक अगुवा रहै और यरूसलेम के परिसद को हिस्सा रहै
रूपरेखा:
1. अपने पढ़न बारेन को अभिवादन करथै।
2. जाके बाद बौ मसीहियन कै प्रोत्साहित करथै कि जब बे कस्ट सहमैं तौ दृढ़ बने रहमैं।
3. फिर बौ कहथै कि करमन के जरिया बिस्वास को दिखाई देनो कैसे जरूरी है।
4. जाके बाद बौ कहथै कि सब्द कितने सक्तिसाली हुई सकथैं।
5. तौ याकूब समझाथै कि कैसे परमेस्वर की बुद्धि दुनिया की बुद्धि से अलग है।
6. जाके बाद बौ अपने पढ़न बारेन कै घमंडी होन के खिलाप चितौनी देथै।
7. याकूब कुछ सामान्य निर्देस दैकै अपनी किताब कै खतम करथै।
परमेस्वर को सच्चो वचन. Copyright © 2024 The Word for the World International and Rana Tharu Translation Samithi, Khatima, UttraKhanda, India. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
Full source notice & licence · CC BY-SA 4.0 · SourceEdition imported 2026-10-25.