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Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि

स्तोत्र 63

दावीद का एक स्तोत्र. जब वह यहूदिया प्रदेश के निर्जन प्रदेश में था.

परमेश्वर, आप मेरे अपने परमेश्वर हैं,

अत्यंत उत्कटतापूर्वक मैं आपके सान्‍निध्य की कामना करता हूं;

सूखी और प्यासी भूमि में,

जहां जल है ही नहीं,

मेरा प्राण आपके लिए प्यासा

एवं मेरी देह आपकी अभिलाषी है.

आपके पवित्र स्थान में मैंने आपका दर्शन किया है,

कि आपके सामर्थ्य तथा तेज को निहारूं.

इसलिये कि आपका करुणा-प्रेम मेरे जीवन की अपेक्षा कहीं अधिक श्रेष्ठ है,

मेरे होंठ आपके स्तवन करते रहेंगे.

मैं आजीवन आपका धन्यवाद करता रहूंगा,

आपकी महिमा का ध्यान करके मैं अपने हाथ उठाऊंगा.

होंठों पर गीत और मुख से स्तुति के वचनों

से मेरे प्राण ऐसे तृप्‍त हो जाएंगे, जैसे उत्कृष्ट भोजन से.

जब मैं बिछौने पर होता हूं, तब आपका स्मरण करता हूं;

मैं रात्रि के प्रहरों में आपके विषय में चिंतन करता रहूंगा.

क्योंकि आप ही मेरे सहायक हैं,

आपके पंखों की छाया मुझे गीत गाने के लिए प्रेरित करती है.

मैं आपके निकट रहना चाहता हूं;

आपका दायां हाथ मुझे संभाले रहता है.

जो मेरे प्राणों के प्यासे हैं, उनका विनाश निश्चित है;

वे पृथ्वी की गहराई में समा जाएंगे.

वे तलवार से घात किए जाने के लिए सौंप दिए जाएंगे,

कि वे सियारों का आहार बन जाएं.

परंतु राजा तो परमेश्वर में उल्‍लसित रहेगा;

वे सभी, जिन्होंने परमेश्वर में श्रद्धा रखी है, उनका स्तवन करेंगे,

जबकि झूठ बोलने वालों के मुख चुप कर दिए जाएंगे.

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि. Copyright © 1978, 2009, 2016, 2019 Biblica, Inc. Licensed under CC BY-SA 4.0. “Biblica” is a trademark registered in the United States Patent and Trademark Office by Biblica, Inc. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.

Full source notice & licence · CC BY-SA 4.0 · SourceEdition imported 2026-10-25.

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