Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
स्तोत्र 138
दावीद की रचना.
याहवेह, मैं हृदय की गहराई से आपका स्तवन करूंगा;
मैं “देवताओं” के सामने आपका स्तवन करूंगा.
आपके पवित्र मंदिर की ओर मुख कर मैं नतमस्तक हूं,
आपके करुणा-प्रेम के लिए; आपकी सच्चाई के लिए मैं
आपके नाम का आभार मानता हूं;
आपने अपने वचन को अपनी महिमा
के भी ऊपर ऊंचा किया है.
जिस समय मैंने आपको पुकारा, आपने प्रत्युत्तर दिया;
आपने मेरे प्राणों में बल के संचार से धैर्य दिया.
पृथ्वी के समस्त राजा, याहवेह, आपके कृतज्ञ होंगे,
क्योंकि उन्होंने आपके मुख से निकले वचन सुने हैं,
वे याहवेह की नीतियों का गुणगान करेंगे,
क्योंकि याहवेह का तेज बड़ा है.
यद्यपि याहवेह स्वयं महान हैं, वह नगण्यों का ध्यान रखते हैं;
किंतु अहंकारी को वह दूर से ही पहचान लेते हैं.
यद्यपि इस समय मेरा विषम समय चल रहा है,
आप मेरे जीवन के रक्षक हैं.
आप ही अपना हाथ बढ़ाकर मेरे शत्रुओं के प्रकोप से मेरी रक्षा करते हैं;
आपका दायां हाथ मेरा उद्धार करता है.
याहवेह मेरे लिए निर्धारित उद्देश्य को पूरा करेंगे;
याहवेह, सर्वदा है आपका करुणा-प्रेम.
अपनी ही हस्तकृति का परित्याग न कीजिए.
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