इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
प्रकाशितवाक्य 7
एक अंतराल
इसके बाद मैंने पृथ्वी के चारों कोनों पर चार स्वर्गदूत खड़े देखे, वे पृथ्वी की चारों हवाओं को थामे हुए थे ताकि पृथ्वी, या समुद्र, या किसी पेड़ पर, हवा न चले। (दानि. 7:2, जक. 6:5) फिर मैंने एक और स्वर्गदूत को जीविते परमेश्वर की मुहर लिए हुए पूरब से ऊपर की ओर आते देखा; उसने उन चारों स्वर्गदूतों से जिन्हें पृथ्वी और समुद्र की हानि करने का अधिकार दिया गया था, ऊँचे शब्द से पुकारकर कहा, “जब तक हम अपने परमेश्वर के दासों के माथे पर मुहर न लगा दें, तब तक पृथ्वी और समुद्र और पेड़ों को हानि न पहुँचाना।” (यहे. 9:4)
इस्राएल के 1,44,000 लोग
और जिन पर मुहर दी गई, मैंने उनकी गिनती सुनी, कि इस्राएल की सन्तानों के सब गोत्रों में से एक लाख चौवालीस हजार पर मुहर दी गई: यहूदा के गोत्र में से बारह हजार पर मुहर दी गई, रूबेन के गोत्र में से बारह हजार पर, गाद के गोत्र में से बारह हजार पर, आशेर के गोत्र में से बारह हजार पर, नप्ताली के गोत्र में से बारह हजार पर; मनश्शे के गोत्र में से बारह हजार पर, शमौन के गोत्र में से बारह हजार पर, लेवी के गोत्र में से बारह हजार पर, इस्साकार के गोत्र में से बारह हजार पर, जबूलून के गोत्र में से बारह हजार पर, यूसुफ के गोत्र में से बारह हजार पर, और बिन्यामीन के गोत्र में से बारह हजार पर मुहर दी गई।
क्लेश से एक बड़ी भीड़
इसके बाद मैंने दृष्टि की, और हर एक जाति, और कुल, और लोग और भाषा में से एक ऐसी बड़ी भीड़, जिसे कोई गिन नहीं सकता था श्वेत वस्त्र पहने और अपने हाथों में खजूर की डालियाँ लिये हुए सिंहासन के सामने और मेम्ने के सामने खड़ी है; और बड़े शब्द से पुकारकर कहती है, “उद्धार के लिये हमारे परमेश्वर का1, जो सिंहासन पर बैठा है, और मेम्ने का जय जयकार हो।” (प्रका. 19:1, भज. 3:8) और सारे स्वर्गदूत, उस सिंहासन और प्राचीनों और चारों प्राणियों के चारों ओर खड़े हैं, फिर वे सिंहासन के सामने मुँह के बल गिर पड़े और परमेश्वर को दण्डवत् करके कहा, “आमीन2, हमारे परमेश्वर की स्तुति, महिमा, ज्ञान, धन्यवाद, आदर, सामर्थ्य, और शक्ति युगानुयुग बनी रहें। आमीन।” इस पर प्राचीनों में से एक ने मुझसे कहा, “ये श्वेत वस्त्र पहने हुए कौन हैं? और कहाँ से आए हैं?” मैंने उससे कहा, “हे स्वामी, तू ही जानता है।” उसने मुझसे कहा, “ये वे हैं, जो उस महाक्लेश में से निकलकर आए हैं; इन्होंने अपने-अपने वस्त्र मेम्ने के लहू में धोकर श्वेत किए हैं। (प्रका. 22:14)
“इसी कारण वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने हैं,
और उसके मन्दिर में दिन-रात उसकी सेवा करते हैं;
और जो सिंहासन पर बैठा है, वह उनके ऊपर अपना तम्बू तानेगा। (प्रका. 22:3, भज. 134:1,2)
“वे फिर भूखे और प्यासे न होंगे;
और न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी।
क्योंकि मेम्ना जो सिंहासन के बीच में है, उनकी रखवाली करेगा;
और उन्हें जीवनरूपी जल के सोतों के पास ले जाया करेगा,
और परमेश्वर उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा।” (भज. 23:1, भज. 23:2, यशा. 25:8)
Source notes (2)
- Footnote उद्धार के लिये हमारे परमेश्वर का: जिसका अर्थ हैं, पाप और मृत्यु से उद्धार, अनन्तकाल की आग के दण्ड से बचाव, पवित्र स्वर्ग में प्रवेश – उस शब्द से जो भी अभिप्राय व्यक्त होता है उस पर विजय परमेश्वर से है।
- Footnote आमीन: “आमीन” शब्द जो कुछ कहा गया है उसकी सच्चाई की पुष्टि करता है।
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