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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019

प्रकाशितवाक्य 5

मुहरबन्द पुस्तक कौन खोल सकता है?

और जो सिंहासन पर बैठा था, मैंने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई थी, और वह सात मुहर लगाकर बन्द की गई थी। (यहे. 2:9-10) फिर मैंने एक बलवन्त स्वर्गदूत को देखा जो ऊँचे शब्द से यह प्रचार करता था “इस पुस्तक के खोलने और उसकी मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?” और न स्वर्ग में1, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्तक को खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला2। तब मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्तक के खोलने, या उस पर दृष्टि करने के योग्य कोई न मिला। इस पर उन प्राचीनों में से एक ने मुझसे कहा, “मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है।” (उत्प. 49:9, यशा. 11:1, यशा. 11:10)

तब मैंने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानो एक वध किया हुआ मेम्ना खड़ा देखा; उसके सात सींग और सात आँखें थीं; ये परमेश्वर की सातों आत्माएँ हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं। (जक. 4:10) उसने आकर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्तक ले ली, (प्रका. 5:1) जब उसने पुस्तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के सामने गिर पड़े; और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएँ हैं। (प्रका. 5:14, प्रका. 19:4)

और वे यह नया गीत गाने लगे,

“तू इस पुस्तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है;

क्योंकि तूने वध होकर अपने लहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से

परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है। (प्रका. 5:12)

“और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया;

और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।” (प्रका. 1:6)

स्वर्गदूतों द्वारा मेम्ने की प्रशंसा

जब मैंने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्वर्गदूतों का शब्द सुना, जिनकी गिनती लाखों और करोड़ों की थी। (दानि. 7:10) और वे ऊँचे शब्द से कहते थे, “वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और स्तुति के योग्य है3।” (प्रका. 5:9) फिर मैंने स्वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब रची हुई वस्तुओं को, और सब कुछ को जो उनमें हैं, यह कहते सुना, “जो सिंहासन पर बैठा है, उसकी, और मेम्ने की स्तुति, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे।” और चारों प्राणियों ने आमीन कहा, और प्राचीनों ने गिरकर दण्डवत् किया।

Source notes (3)
  1. Footnote और न स्वर्ग में: इसका अभिप्राय यह हैं कि स्वर्ग में ऐसा कोई नहीं था – जो उसे खोल सकता था - विशेषकर यह सृजित प्राणियों की ओर इशारा करता हैं।
  2. Footnote न .... उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला: यह उनकी शक्ति से परे नहीं था कि केवल पुस्तक को देखें जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि यूहन्ना स्वयं उस पुस्तक को उसके हाथ में देख रहा था जो उस सिंहासन पर बैठा था।
  3. Footnote स्तुति के योग्य है: यहाँ अर्थ है कि वह योग्य था कि उसे इन सब बातों का श्रेय प्राप्त हो।

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.

Full source notice & licence · CC BY-SA 4.0 · SourceEdition imported 2026-10-25.

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