इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
भजन संहिता 58
अन्याय के खिलाफ प्रार्थना
प्रधान बजानेवाले के लिये अल-तशहेत राग में दाऊद का मिक्ताम
हे मनुष्यों, क्या तुम सचमुच धार्मिकता की बात बोलते हो?
और हे मनुष्य वंशियों क्या तुम सिधाई से न्याय करते हो?
नहीं, तुम मन ही मन में कुटिल काम करते हो;
तुम देश भर में उपद्रव करते जाते हो।
दुष्ट लोग जन्मते ही पराए हो जाते हैं,
वे पेट से निकलते ही झूठ बोलते हुए भटक जाते हैं।
उनमें सर्प का सा विष है;
वे उस नाग के समान है, जो सुनना नहीं चाहता1;
और सपेरा कितनी ही निपुणता से क्यों न मंत्र पढ़े,
तो भी उसकी नहीं सुनता।
हे परमेश्वर, उनके मुँह में से दाँतों को तोड़ दे;
हे यहोवा, उन जवान सिंहों की दाढ़ों को उखाड़ डाल!
वे घुलकर बहते हुए पानी के समान हो जाएँ;
जब वे अपने तीर चढ़ाएँ, तब तीर मानो दो टुकड़े हो जाएँ।
वे घोंघे के समान हो जाएँ जो घुलकर नाश हो जाता है,
और स्त्री के गिरे हुए गर्भ के समान हो जिसने सूरज को देखा ही नहीं।
इससे पहले कि तुम्हारी हाँड़ियों में काँटों की आँच लगे,
हरे व जले, दोनों को वह बवण्डर से उड़ा ले जाएगा।
परमेश्वर का ऐसा पलटा देखकर आनन्दित होगा;
वह अपने पाँव दुष्ट के लहू में धोएगा2।
तब मनुष्य कहने लगेंगे, निश्चय धर्मी के लिये फल है;
निश्चय परमेश्वर है, जो पृथ्वी पर न्याय करता है।
Source notes (2)
- Footnote वे उस नाग के समान है, जो सुनना नहीं चाहता: सर्प बहरा होता है उसे कुछ भी सिखाया नहीं जा सकता, उसे मन्त्रमुग्ध नहीं किया जा सकता। ऐसा प्रतीत होता है, कि वह सुनना ही नहीं चाहता है।
- Footnote वह अपने पाँव दुष्ट के लहू में धोएगा: यह रूपक युद्ध क्षेत्र का है जहाँ विजेता मृतकों के लहू पर चलता है।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
Full source notice & licence · CC BY-SA 4.0 · SourceEdition imported 2026-10-25.