इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
अय्यूब 41
“फिर क्या तू लिव्यातान को बंसी के द्वारा खींच सकता है,
या डोरी से उसका जबड़ा दबा सकता है?
क्या तू उसकी नाक में नकेल लगा सकता
या उसका जबड़ा कील से बेध सकता है?
क्या वह तुझ से बहुत गिड़गिड़ाहट करेगा,
या तुझ से मीठी बातें बोलेगा?
क्या वह तुझ से वाचा बाँधेगा
कि वह सदा तेरा दास रहे?
क्या तू उससे ऐसे खेलेगा जैसे चिड़िया से,
या अपनी लड़कियों का जी बहलाने को उसे बाँध रखेगा?
क्या मछुए के दल उसे बिकाऊ माल समझेंगे?
क्या वह उसे व्यापारियों में बाँट देंगे?
क्या तू उसका चमड़ा भाले से,
या उसका सिर मछुए के त्रिशूलों से बेध सकता है?
तू उस पर अपना हाथ ही धरे, तो लड़ाई को कभी न भूलेगा,
और भविष्य में कभी ऐसा न करेगा।
देख, उसे पकड़ने की आशा निष्फल रहती है;
उसके देखने ही से मन कच्चा पड़ जाता है।
कोई ऐसा साहसी नहीं, जो लिव्यातान को भड़काए;
फिर ऐसा कौन है जो मेरे सामने ठहर सके?
किसने मुझे पहले दिया है, जिसका बदला मुझे देना पड़े!
देख, जो कुछ सारी धरती पर है, सब मेरा है। (रोम. 11:35,36)
“मैं लिव्यातान के अंगों के विषय,
और उसके बड़े बल और उसकी बनावट की शोभा के विषय चुप न रहूँगा। (उत्प. 1:25)
उसके ऊपर के पहरावे को कौन उतार सकता है?1
उसके दाँतों की दोनों पाँतियों के अर्थात् जबड़ों के बीच कौन आएगा?
उसके मुख के दोनों किवाड़ कौन खोल सकता है?
उसके दाँत चारों ओर से डरावने हैं।
उसके छिलकों की रेखाएँ घमण्ड का कारण हैं;
वे मानो कड़ी छाप से बन्द किए हुए हैं।
वे एक दूसरे से ऐसे जुड़े हुए हैं,
कि उनमें कुछ वायु भी नहीं पैठ सकती।
वे आपस में मिले हुए
और ऐसे सटे हुए हैं, कि अलग-अलग नहीं हो सकते।
फिर उसके छींकने से उजियाला चमक उठता है,
और उसकी आँखें भोर की पलकों के समान हैं।
उसके मुँह से जलते हुए पलीते निकलते हैं,
और आग की चिंगारियाँ छूटती हैं।
उसके नथनों से ऐसा धुआँ निकलता है,
जैसा खौलती हुई हाण्डी और जलते हुए नरकटों से।
उसकी साँस से कोयले सुलगते,
और उसके मुँह से आग की लौ निकलती है।
उसकी गर्दन में सामर्थ्य बनी रहती है,
और उसके सामने डर नाचता रहता है।
उसके माँस पर माँस चढ़ा हुआ है,
और ऐसा आपस में सटा हुआ है जो हिल नहीं सकता।
उसका हृदय पत्थर सा दृढ़ है,
वरन् चक्की के निचले पाट के समान दृढ़ है।
जब वह उठने लगता है, तब सामर्थी भी डर जाते हैं,
और डर के मारे उनकी सुध-बुध लोप हो जाती है।
यदि कोई उस पर तलवार चलाए, तो उससे कुछ न बन पड़ेगा;
और न भाले और न बर्छी और न तीर से। (अय्यू. 39:21-24)
वह लोहे को पुआल सा,
और पीतल को सड़ी लकड़ी सा जानता है।
वह तीर से भगाया नहीं जाता,
गोफन के पत्थर उसके लिये भूसे से ठहरते हैं2।
लाठियाँ भी भूसे के समान गिनी जाती हैं;
वह बर्छी के चलने पर हँसता है।
उसके निचले भाग पैने ठीकरे के समान हैं,
कीचड़ पर मानो वह हेंगा फेरता है।
वह गहरे जल को हण्डे के समान मथता है
उसके कारण नील नदी मरहम की हाण्डी के समान होती है।
वह अपने पीछे चमकीली लीक छोड़ता जाता है।
गहरा जल मानो श्वेत दिखाई देने लगता है। (अय्यू. 38:30)
धरती पर उसके तुल्य और कोई नहीं है,
जो ऐसा निर्भय बनाया गया है।
जो कुछ ऊँचा है, उसे वह ताकता ही रहता है,
वह सब घमण्डियों के ऊपर राजा है।”
Source notes (2)
- Footnote उसके ऊपर के पहरावे को कौन उतार सकता है?: नि:सन्देह ऊपर का पहरावा अर्थात् उसकी त्वचा। अर्थात् उसकी कठोर त्वचा उसकी रक्षा का कवच है और कोई भी इस कवच को उतार कर, उस पर हावी नहीं हो सकता है।
- Footnote गोफन के पत्थर उसके लिये भूसे से ठहरते हैं: वह लोहे और पीतल के हथियारों को भूसा या सड़ी गली लकड़ी समझता है। अर्थात् उस पर उनका प्रभाव नहीं पड़ता है।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
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