1 थिस्सलुनीकियों
1 Thessalonians
Introduction from this edition
1 थिस्सलुनीकियो खे नाम पौलुस प्रेरित कि चिठ्ठी
1 थिस्सलुनीकिहोन का नाम पौलुस प्रेरित कि चिठ्ठी
पैछान
थिस्सलुनीखे किहोन की चिट्ठी पौलुस बीच मे मीशनरी अरु पादर का रुप मे महान अंतरदृष्टि प्रदान करस हइ.
अरु दो ने एक-दूसरा को मसीह का जसी सेवा करी, जो परमेश्वर कि दुन्याहोन का बीच मे पायो जास हइ. शैली सामग्री प्रकार कथाहोन की शैली बापदादा नैतिक नीर्देश की हय, कयी नीम्नलिखित करणो सी ग्रीक-रोमन अभिभाषक परंपराहोन की कोइ विशेषतावों को प्रदर्शित करस हइ या चिट्ठी कोइ तरह का विशेष कर देशवासिहोन का बाहेर विरोध बावजूद अपनो नवो विश्वास अरु आचरन बनायो रखन का लिये अभिभाषहोन सूचित करस हइ. या उनकी चुनी हुइ स्थिति को विश्वासिहोन आत्मा विश्वास दिलास हइ अरु विश्वास मे उनको पहलो पदचिन्ह अरु पौलुस खे प्रसन्न करस हइ, यो जोर देस हइ कि पौलुस की शिक्षा परमेश्वर से हइ, नी कि फक्त मानव से अरु येका लिये उनका ये मे मजबूत रहनो चास
रुप रेखा
1. पौलुस अपनी चिठ्ठी कि सुरुवात अरु मंडली को नमस्कार करखे अरु परमेश्वर को धन्यवाद देते हुए करता है
2. पौलुस का अपने काम अरु तिमुथियो ने लाये हुये समाचार खे विषय मेचरचा करता है
3. उसखे बाद पौलुस यीशु का दुसरी बार आन का टेम मे मसीह तैयारी करणे खे लिये मसीह मे कसो जिवन जिना होनु.
4. पौलुस चिठ्ठी कि अन्त मंडली खे फिर से नमस्कार अरु उनने बताता है कि ह्या चिठ्ठी पढतो होनु है
परमेश्वर को पवित्र वचन. Copyright © 2024 The Word for the World International. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
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