Biblica® सुतंतर समकालीन छत्तीसगढ़ी अनुवाद
अयूब 41
“का तेंह लिबयातान1 ला मछरी धरे के गरी ले तीरके निकाल सकथस
या डोरी ले ओकर जीभ ला बांध सकत हस।
का तेंह ओकर नाक म नत्थी लगा सकथस
या ओकर जबड़ा ला लोहा के कांटा ले छेद सकथस?
का ओह तोर ले दया के भीख मांगही?
का ओह तोर ले गुरतूर बोली बोलही?
का ओह तोर ले करार करही
कि तेंह ओला जिनगी भर अपन गुलाम बना ले?
का तेंह ओला कोनो चिरई के सहीं पालतू बना सकथस
या अपन घर म जवान माईलोगनमन के खेले बर ओमा पट्टा बांधके रख सकबे?
का बेपारीमन ओकर बर मोलभाव करहीं?
का ओमन ओला बेपारीमन के बीच म बांट दीहीं?
का तेंह ओकर खाल ला भाला ले,
या ओकर मुड़ ला मछरी मारे के बरछी ले भर सकथस?
यदि तेंह ओकर ऊपर अपन हांथ रखथस,
त तोला ओकर संग लड़े के सुरता आही अऊ तेंह अइसने फेर कभू नइं करबे!
ये बेकार के आसा ए कि तेंह ओला अपन अधिकार म रखबे;
तेंह ओकर आघू म आवत ही हार जाबे।
काकरो हिम्मत नइं ए कि ओला भड़कावंय।
त फेर कोन ह मोर सामना कर सकथे?
कोन ह मोला देय हवय कि मेंह ओला लहुंटावंव?
स्वरग के खाल्हे के जम्मो चीज मोर अय।
“मेंह लिबयातान के अंग, ओकर बल
अऊ ओकर सोभायमान रूप के बारे म बताय बर चुप नइं रहंव।
कोन ह ओकर बाहिर के आवरन ला उतार सकत हे?
कोन ह ओकर दोहरा कवच ला भेद सकथे?
कोन ह ओकर मुहूं ला खोले के हिम्मत कर सकथे?
जेकर भयानक दांतमन एक-दूसर ले जुड़े रहिथें।
ओकर पीठ म तह के तह ढालमन हवंय,
जऊन म मजबूती से एक संग मुहर लगे हवय;
ओमन एक-दूसर ले अइसे संटे हवंय
कि ओमन के बीच म ले हवा घलो नइं निकल सकय।
ओमन एक-दूसर ले मजबूती ले जुड़े हवंय;
ओमन एक-दूसर ले लिपटे हवंय अऊ ओमन ला अलग नइं करे जा सकय।
ओकर छींक ले अंजोर चमकथे;
ओकर आंखीमन बिहनियां के किरन कस अंय।
ओकर मुहूं ले बरत जुवाला निकलथे;
अऊ आगी के चिनगारी निकलथे।
ओकर नाक के छेदा ले धुआं निकलथे
जइसे बरत सरकंडामन ऊपर रखे उबलत बरतन ले निकलथे।
ओकर सांस ले कोइला ह बरथे,
अऊ ओकर मुहूं ले आगी के जुवाला निकलथे।
ओकर घेंच म ताकत रहिथे;
अऊ डर ह ओकर आघू-आघू जाथे।
ओकर मांस-पेसी के परतमन कसके जूरे हवंय;
ओमन मजबूत हवंय अऊ डोलंय नइं।
ओकर छाती ह पथरा कस कठोर हवय,
जांता के तरी के कुटा कस कठोर हवय।
जब ओह ठाढ़ होथे, त बलवालामन घलो डरा जाथें;
येकर मारे-कुटे के पहिले, ओमन पाछू हट जाथें।
ओकर ऊपर तलवार चलाय ले घलो ओला कुछू नइं होवय,
अऊ न ही भाला या बान या बरछी के परभाव पड़य।
ओह लोहा ला पैंरा सहीं
अऊ कांसा ला सरे लकरी सहीं जानथे।
बान ह ओला भगाय नइं सकय;
गुलेल के पथरा ह ओकर बर भूंसा सहीं अय।
लउठी घलो ओला पैंरा सहीं लगथे;
ओह बरछी के अवाज ऊपर हांसथे।
ओकर खाल्हे के भाग ह माटी के फटे बरतन के धार सहीं अय,
जऊन ह चीखला म अनाज कुटे के पट्टा सहीं चिनहां छोंड़थे।
ओह समुंदर के पानी ला खउलत हांड़ी के सहीं मथथे
अऊ समुंदर ला मलहम के बरतन सहीं हलाथे।
ओह अपन पाछू म एक चमकीला धारी छोंड़त जाथे;
मानो गहिरा पानी के सफेद बाल हवय।
धरती म ओकर बरोबर कोनो चीज नइं ए—
एक जीव जेला काकरो डर नइं ए।
ओह हर एक अभिमानी ला नीचा देखथे;
जम्मो घमंड करइयामन ऊपर ओह राजा अय।”
Source notes (1)
- Footnote देखव 3:8 ला
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