1 थिस्स
1 Thessalonians
Introduction from this edition
1 थिस्सलुनीकियों कलीसिया के लिए पौलुस की चिट्ठी
1 थिस्सलुनीकियन मंडली के निता पोलुस कर चिट्ठी
परचा
थिस्सलुनीकियन के पहिला चिट्ठी चेला पोलुस
मंडली के स्थापना के बादो पोलुस थिस्सलुनीके सहर हे रहै हे सक्छम नेहको रथै, इहैनिता ऊ बाद हे हइ चिट्ठी के उहां के बिस्वासिन के प्रोत्साहन करै के निता पठोथै। चिट्ठी हे कइठे बिसय के सामिल करे गय हबै, अउ बिस्वासिन के कइसन रहै चाही, एखर बारे हे कइठे अक जसना सिक्छा हबै। पोलुस मसीह के दूसर आगमन हे धियान देथै, सायद थिस्सलुनीकियन के मंडली के बिस्वासी ई बिसय हे बिसेस रूप लग रुचि रखथै। पोलुस मसीह के दूसर आगमन के भगवान के खुस करै बाले जीवन जीय के सीख के रूप हे निस्तार करिस।
रूप रेखा
1. पोलुस हइ चिट्ठी के सुरुवात मंडली के सोगत करै अउ उनखर निता भगवान के धन्यबाद देय के दवारा करथै।
2. फेर ऊ अपन काम अउ तीमुथियुस दवारा लाय गय खबर के बारे गुठेथै।
3. आगू पोलुस सिक्छा देथै कि कइसन बिस्वासिन के यीसु के दूसर आगमन के उजियार हे रहै चाही।
4. पोलुस मंडली के फेरै लग नमस्ते करत अउ हइ निस्चित करै के निता कथै कि मंडली हे हर मनसे चिट्ठी के पढथै।
भगवान कर सच्चा बचन. Copyright © The Word for the World International. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
Full source notice & licence · CC BY-SA 4.0 · SourceEdition imported 2026-10-25.