सत मारग पर चलन वारो किताब
योहन 16
यो गोस्टी मिना तुमी लक एकोलाय सांगासू का तुम्हि डावाडोल नोको होव। वय तुम्हिला पिराथना सभा अना समाज लक हेड़ देहेत, इतरोच नही पर उ बेरा आवासे, की जो कोनी तुमला मार डाकेह, उ समजेत की मि परमेस्वर की सेवा करुसु। असो वय एकोलाय करयेत, की उन बाबूजी ला नही जानासेत, अना मोला भी नही जानासेत। पर यो गोस्टी मिना एकोलाय तुमी लक सांगीसेउ की जबा एको बेरा आहे तो तुमला हेत आहे की मिना तुम्हि लक पुढा च सांग दियो होतो।
पवीतर आतमा को काम
मि ना सुरु मा तुम्हि लक यो गोस्टी एकोलाय नही सांगयो, काहे की मि तुम्हारो सँग होतो, पर अबा मि आपरो धाड़नवालो को जवर जावासू अना तुम्हि मा लक कोनी मोरो लक नही पुसेत, तु कहाँन जासेस? पर मिना जोन गोस्टी तुमी लक सांगीसेउ एकोलाय तुम्हारो मन सोक लक भरीयो से। ता भी मि तुम्हि ला खरो सांगासू, का मोरो जावनो तुमरो लाय साजरो से, काहेकी अदी मि नही जाऊ तो उ सहायक तुमरो जवर नही आहेत, पर अदी मि जाउ तबा ओला तुमरो जवर धाड़ू। उ आयके जगत ला पाप अना नेकी अना न्याय को बारेमा बेजवाब करेत। पाप को बारे मा एकोलाय की वय मोरो पर भरोसा नही करयेत। अना नेकीपन को बारे मा एकोलाय की मि बाबूजी को जवर जासू अना तुमी मोला मँग नही चोहो। न्याय को बारे मा एकोलाय का जगत को मुखिया दोसी ठयरायो गई से।
मोला तुम्हि लक अखीन भी लगत सी गोस्टी कव्हनो से, पर अबा तुमी उनला सहन नही कर सकेत। पर जबा उ असो खराई को आतमा आहे, ता तुमला सबच खराई को रास्ता सांगेत, काहेकी उ आपरो कन लक नही सांगेत पर जोन-जोन काही आयकेत वाच ला सांगेत अना आवनवालो गोस्टी तुमला सांगेत। उ मोरी बड़ाई करेत, काहेकि उ मोरो गोस्टी लक तुम्हिला सांगेत। जोन काही बाबूजी को से, उ सबच मोरो से, एकोलाय मिना कव्हयो का उ मोरी गोस्टी मा लक तुम्हिला सांगेत।
दुख ला सुक मा बदलेत
जरासो बेरा को बादमा तुम्हि मोला नही चोवने पर जरासो बेरा को बाद मंग मोला चोवने।
यो गोस्टी आयक के यीसु को काही चेलागीन एकमेक लक सांगन लगीन, यो अमीला काजक सांगासे? जरासो बेरा मा तुमी मोला नही चोवने, मँग जरासो बेरा मा तुम्हि मोला चोवने। तबा चेला गीन ना कहीन, “ यो जरासो बेरा” कव्हसे, एको काजक मतलब से, अमीला समजमा नही आवासेत?
यीसु जानत होतो का वय वोको लक काही सवाल करनो चाव्हासेत, तबा यीसु ना कव्हयो, तुम्हि एकमेक लक बिचार करासो, का यो “जरासो बेरा मा मोला नही चोवने मंग जरासो बेरा मा मोला चोवने” को काजक मतलब सेत? मि तुम्हिला खरो सांगासू का “तुम्हि रड़तो रव्हने अना जगत खुसहाली मनाहेत, तुम्हिला दुख होहेत पर तुमरो दुख खुसहाली मा बदल जाहेत। लेकरा जलम लेवन को पुढा बायका ला दरद होवासे, काहे की ओकी दुख को बेरा आय जासे, पर जबा वा लेकरा को जलम भयी जासे ता वा खुसहाली मनावासे, का एक मानूस तन जलम लेयीसेस, अना वा मुसीबत ला हेत नही करासे। वसोच परकार लक तुम्हिला अबा सोक से पर मि तुमी लक मँग मिलहु अना तुमरो मन खुसहाली लक भर जाहे। अना तुमरो खुसहाली कोनी तुम लक नही हिसक सकेत।”
वोना दिवस तुम्हि लोक मोला काही नही पुसने, मि तुमरो लक खरो-खर सांगासू, “अदी मोरो नाव लक तुम्हि बाबूजी लक काही माँगने, ता उ मोरो नाव लक तुम्हिला देहेत। अबा तकन तुम्हि लोक ना मोरो नाव लक काही नही माँगीसेव, माँगो तो तुम्हिला भेटेत, जोनलक तुमरो खुसहाली पूरो भई जाहेत।”
मी दुनियाँ ला जीत लियो सेऊ
मिना यो गोस्टी तुम्हिला उदाहरन लक सांगीसेउ, पर उ बेरा आवासे, मि तुम्हिला उदाहरन लक नही सांगू पर अबा मी तुम्हिला बाबूजी को बारे सपा-सपा साँगु। ओनो दिवस तुम्हि लोक मोरो नाव लक माँगने अना मि तुम्हिला यो नही सांगासु, की मि तुमरो लाय बाबूजी लक बिनती करुहुँ। काहे की परमेस्वर तो खुदच तुम्हिला माया करासे। काहेका तुम्हिना मोरो लक माया करयो से, अना यो भी भरोसा करासेव की मि बाबूजी को कनलक आईसेऊ। मि बाबूजी को कन लक जगत मा आयीसेऊ, अना मि मंग जगत ला सोड़के बाबूजी को जवर जावासू।
तब यीसू ना चेलागीन ना कहीन, चोव, अता तो तु खोलके सांग दियोसे, अना कोनी उदाहरन नही सांगासेस। अता हमि जान गई सेजन की तु सबच काही जानासेस, अता जरूरत नहात, की कोनी तोरो लक काही पुसेत, एकोलाय अमी भरोसा करासेजन की तु परमेस्वर को कन लक आईसेस।
यो आयक के यीसु ना उन लक जवाब दियो, का तुम्हि अता भरोसा करासेव। चोवो, उ घडी आवासे, की तुमी सबच भटक जाहो अना आपरो-आपरो रास्ता लेहो, अना मोला एकलो सोड़ देहो। ता भी मि एकलो नही सेव, पर बाबूजी मोरो सँगमा से। मि ना यो गोस्टी तुमला एकोलाय सांगीसेऊ की तुमला मोरो सान्ती मिल्हे, जगत मा तुम्हिला दुख होवासे, पर हिम्मत राखो! मि ना जगत ला जीत लियोसेऊ।
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