इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
नीतिवचन 17
चैन के साथ सूखा टुकड़ा, उस घर की अपेक्षा उत्तम है,
जो मेलबलि-पशुओं से भरा हो, परन्तु उसमें झगड़े-रगड़े हों।
बुद्धि से चलनेवाला दास अपने स्वामी के उस पुत्र पर जो लज्जा का कारण होता है प्रभुता करेगा,
और उस पुत्र के भाइयों के बीच भागी होगा।
चाँदी के लिये कुठाली, और सोने के लिये भट्ठी होती है1,
परन्तु मनों को यहोवा जाँचता है। (1 पत. 1:17)
कुकर्मी अनर्थ बात को ध्यान देकर सुनता है,
और झूठा मनुष्य दुष्टता की बात की ओर कान लगाता है।
जो निर्धन को उपहास में उड़ाता है, वह उसके कर्त्ता की निन्दा करता है;
और जो किसी की विपत्ति पर हँसता है, वह निर्दोष नहीं ठहरेगा।
बूढ़ों की शोभा उनके नाती पोते हैं;
और बाल-बच्चों की शोभा उनके माता-पिता हैं।
मूर्ख के मुख से उत्तम बात फबती नहीं,
और इससे अधिक प्रधान के मुख से झूठी बात नहीं फबती।
घूस देनेवाला व्यक्ति घूस को मोह लेनेवाला मणि समझता है;
ऐसा पुरुष जिधर फिरता, उधर उसका काम सफल होता है।
जो दूसरे के अपराध को ढाँप देता है, वह प्रेम का खोजी ठहरता है2,
परन्तु जो बात की चर्चा बार बार करता है, वह परम मित्रों में भी फूट करा देता है।
एक घुड़की समझनेवाले के मन में जितनी गड़ जाती है,
उतना सौ बार मार खाना मूर्ख के मन में नहीं गड़ता।
बुरा मनुष्य दंगे ही का यत्न करता है,
इसलिए उसके पास क्रूर दूत भेजा जाएगा।
बच्चा–छीनी–हुई–रीछनी से मिलना,
मूर्खता में डूबे हुए मूर्ख से मिलने से बेहतर है।
जो कोई भलाई के बदले में बुराई करे,
उसके घर से बुराई दूर न होगी।
झगड़े का आरम्भ बाँध के छेद के समान है,
झगड़ा बढ़ने से पहले उसको छोड़ देना उचित है।
जो दोषी को निर्दोष, और जो निर्दोष को दोषी ठहराता है,
उन दोनों से यहोवा घृणा करता है।
बुद्धि मोल लेने के लिये मूर्ख अपने हाथ में दाम क्यों लिए है?
वह उसे चाहता ही नहीं।
मित्र सब समयों में प्रेम रखता है,
और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है।
निर्बुद्धि मनुष्य बाध्यकारी वायदे करता है,
और अपने पड़ोसी के कर्ज का उत्तरदायी होता है।
जो झगड़े-रगड़े में प्रीति रखता, वह अपराध करने से भी प्रीति रखता है,
और जो अपने फाटक को बड़ा करता3, वह अपने विनाश के लिये यत्न करता है।
जो मन का टेढ़ा है, उसका कल्याण नहीं होता,
और उलट-फेर की बात करनेवाला विपत्ति में पड़ता है।
जो मूर्ख को जन्म देता है वह उससे दुःख ही पाता है;
और मूर्ख के पिता को आनन्द नहीं होता।
मन का आनन्द अच्छी औषधि है,
परन्तु मन के टूटने से हड्डियाँ सूख जाती हैं।
दुष्ट जन न्याय बिगाड़ने के लिये,
अपनी गाँठ से घूस निकालता है।
बुद्धि समझनेवाले के सामने ही रहती है,
परन्तु मूर्ख की आँखें पृथ्वी के दूर-दूर देशों में लगी रहती हैं।
मूर्ख पुत्र से पिता उदास होता है,
और उसकी जननी को शोक होता है।
धर्मी को दण्ड देना,
और प्रधानों को खराई के कारण पिटवाना, दोनों काम अच्छे नहीं हैं।
जो सम्भलकर बोलता है, वह ज्ञानी ठहरता है;
और जिसकी आत्मा शान्त रहती है, वही समझवाला पुरुष ठहरता है।
मूर्ख भी जब चुप रहता है, तब बुद्धिमान गिना जाता है;
और जो अपना मुँह बन्द रखता वह समझवाला गिना जाता है।
Source notes (3)
- Footnote चाँदी के लिये कुठाली, और सोने के लिये भट्ठी होती है: शुद्ध धातु में मिश्रित मैल अलग करना बहुत अच्छा है परन्तु परमेश्वर के अनुशासन में और भी अधिक उत्तम बात है जो छिपी हुई अच्छाई का शोधन करती है।
- Footnote जो दूसरे के अपराध को ढाँप देता है, वह प्रेम का खोजी ठहरता है: यह एक चेतावनी है जो किसी पूर्वकालिक अपराध को भुलाने की अपेक्षा मनुष्य को जलन में जीवन व्यतीत करनेवाली प्रेरणा के विरुद्ध है।
- Footnote फाटक को बड़ा करता: भव्य मकान बनाता है, घमण्डी ठाट बाट में आनन्द करता है।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
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