फ़िले
Philemon
Introduction from this edition
फ़िलेमोन के नाम पौलुस रसूल का ख़त
मुसन्निफ़ की पहचान
फ़िलेमोन की किताब का मुसन्निफ़ पौलूस रसूल था (1:1) फ़िलेमोन को लिखे गए ख़त में पौलूस कहता है वह उनेसमुस को वापस फ़िलेमोन के पास भेज रहा है और कुलुस्सियों 4:9 में उनेसमुस को इस बतौर पहचाना गया है कि उस को तखि़कुस के साथ कुलुस्से भेजा गया है। (तखि़कुस के हाथ कुलुस्से की कलीसिया के लिए ख़त भेजा गया था)। यह दिलचस्प है कि पौलूस ख़ुद ही अपने हाथों से इस ख़त को लिखा यह जताने के लिए कि उनेसमुस उस के लिए कितना अहम था।
लिखे जाने की तारीख़ और जगह
इस ख़त के लिखे जाने की तारीख़ तक़रीबन ईस्वी 60 के बीच है।
पौलूस ने रोम में फ़िलेमोन को ख़त लिखा। जब वह इस ख़त को लिख रहा था तो उस वक़्त वह रोम के हवालात में बन्द था।
क़बूल कुनिन्दा पाने वाले
पौलूस ने फ़िलेमोन, अफ़िया, अरखि़पुस और कलीसिया को लिखा जो अरखि़पुस के घर में जमा‘ होती थी। ख़त के मज़्मून से यह साफ़ हो जाता है कि फ़िलेमोन सब से पहला मख़्तूबा क़ारी था।
असल मक़सूद
पौलूस ने फ़िलेमोन को क़ायल करने के लिए लिखा कि उनेसमुस को वापस अपने घर में रख ले। (इस उनेसमुस ने फ़िलेमोन के घर के सामान की चोरी की थी और भाग गया था वह गुलाम था और उसने ख़म्याज़ा भी नाहीं भरा था); (10 — 12, 17) इस के अलावा पौलूस चाहता था कि फ़िलेमोन उनेसमुस के साथ गुलाम की तरह बर्ताव न करे बल्कि अज़ीज़ भाई की तरह (15 — 16) उनेसमुस अभी भी फ़िलेमोन की जायेदाद था क्योंकि वह उसका ग़ुलाम था। और पौलूस ने फ़िलेमोन को इतनी नर्मी से लिखा कि उनेसमुस वापस अपने मालिक के पास चला जाए। पौलूस के इस तरह से सिफ़ारिश करने के ज़रिए उनेसमुस एक मसीही बन गया था (1:10)।
मौज़’अ
मुआफ़ी
बैरूनी ख़ाका
1. सलाम — 1:1-3
2. शुकरिया अदा करना — 1:4-7
3. उनेसमुस के लिए सिफ़रिश — 1:8-22
4. आख़री अल्फ़ाज़ — 1:23-25
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