अब्द
Obadiah
Introduction from this edition
अब्दयाह
मुसन्निफ़ की पहचान
1 यह किताब अब्दयाह नाम एक नबी के लिए वस्फ़की गई है। मगर हमारे पास उसकी बाबत सवानेह उमरी की इतला (मालूमात) नहीं है। अदालत की इस सारी नबुवत में अब्दयाह यरूशलेम पर ज़ोर देता है ख़ास तौर से इदोम की क़ौम की बाबत जो बाहर की क़ौम है। यह किताब हमें कम अज़ कम यह क़्यास करने देता है कि अब्दयाह यरूशलेम के नज़्दीक यहूदियाह के जुनूबी सलतनत के किसी मक़ाम से आया था।
लिखे जाने की तारीख़ और जगह
इस की तस्नीफ़ की तारीख़ तक़रीबन 605 - 586 क़ब्ल मसीह के दर्मियान है।
ऐसा लगता है कि अब्दयाह ने इस को यरूशलेम के ज़वाल के बाद लिखा (अब्दयाह 11 — 14) शायद बाबुल की जिलावतनी के दौरान।
क़बूल कुनिन्दा पाने वाले
मख़्तूबा नाज़रीन व सामईन इदोम की दख़ल अन्दाज़ी के बाद बचे कुचे लोग।
असल मक़सूद
अब्दयाह ख़ुदा का एक नबी है जो एक उम्दा मौक़े का इस्तेमाल करता है ताकि एदोम को ख़ुदा और इस्राईल के खि़लाफ़ किए गये गुनाह के लिए मलामत करे। एदोम के बोग एसाव की नसल हैं जबकि इस्राईली उस के जुड़वे भाई याक़ूब की नसल से हैं। इन दो भाइयों के झगड़े ने इन दोनों की नस्लों पर असर डाला है। इस तक़्सीम ने एदोमियों को मज्बूर किया कि वह इस्राईलियों को उन के मिस्र से ख़ुरूज के दौरान अपने मुल्क से पार करने से रोका एदोमियों के घमण्ड का गुनाह ख़ुदावन्द की तरफ़ से अदालत के सख़्त अलफ़ाज़ की ज़रूरत ले आता है। एक वायदे की तकमील और आख़री दिनों में छुटकारे के अलफ़ाज़ के साथ यह किताब ख़तम होती है जब यह मुल्क ख़ुदा के लोगों के लिए उन पर हुकूमत करते हुए बहाल किया जाएगा।
मौज़’अ
रास्तबाज़ फ़ैसला।
बैरूनी ख़ाका
1. अदोम की बर्बादी — 1:1-14
2. इस्राईल की आख़री फ़तह — 1:15-21
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