इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
नीतिवचन 26
जैसा धूपकाल में हिम का, या कटनी के समय वर्षा होना,
वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती।
जैसे गौरैया घूमते-घूमते और शूपाबेनी उड़ते-उड़ते नहीं बैठती,
वैसे ही व्यर्थ श्राप नहीं पड़ता।
घोड़े के लिये कोड़ा, गदहे के लिये लगाम,
और मूर्खों की पीठ के लिये छड़ी है।
मूर्ख को उसकी मूर्खता के अनुसार उत्तर न देना ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे।
मूर्ख को उसकी मूर्खता के अनुसार उत्तर देना,
ऐसा न हो कि वह अपनी दृष्टि में बुद्धिमान ठहरे।
जो मूर्ख के हाथ से सन्देशा भेजता है,
वह मानो अपने पाँव में कुल्हाड़ा मारता और विष पीता है।
जैसे लँगड़े के पाँव लड़खड़ाते हैं,
वैसे ही मूर्खों के मुँह में नीतिवचन होता है।
जैसे पत्थरों के ढेर में मणियों की थैली,
वैसे ही मूर्ख को महिमा देनी होती है।
जैसे मतवाले के हाथ में काँटा गड़ता है,
वैसे ही मूर्खों का कहा हुआ नीतिवचन भी दुःखदाई होता है।
जैसा कोई तीरन्दाज जो अकारण सब को मारता हो,
वैसा ही मूर्खों या राहगीरों का मजदूरी में लगानेवाला भी होता है।
जैसे कुत्ता अपनी छाँट को चाटता है,
वैसे ही मूर्ख अपनी मूर्खता को दोहराता है। (2 पत. 2:20-22)
यदि तू ऐसा मनुष्य देखे जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान बनता हो,
तो उससे अधिक आशा मूर्ख ही से है।
आलसी कहता है, “मार्ग में सिंह है,
चौक में सिंह है!”
जैसे किवाड़ अपनी चूल पर घूमता है,
वैसे ही आलसी अपनी खाट पर करवटें लेता है।
आलसी अपना हाथ थाली में तो डालता है,
परन्तु आलस्य के कारण कौर मुँह तक नहीं उठाता।
आलसी अपने को ठीक उत्तर देनेवाले
सात मनुष्यों से भी अधिक बुद्धिमान समझता है।
जो मार्ग पर चलते हुए पराए झगड़े में विघ्न डालता है,
वह उसके समान है, जो कुत्ते को कानों से पकड़ता है।
जैसा एक पागल जो जहरीले तीर मारता है,
वैसा ही वह भी होता है जो अपने पड़ोसी को धोखा देकर कहता है,
“मैं तो मजाक कर रहा था।”
जैसे लकड़ी न होने से आग बुझती है,
उसी प्रकार जहाँ कानाफूसी करनेवाला नहीं, वहाँ झगड़ा मिट जाता है।
जैसा अंगारों में कोयला और आग में लकड़ी होती है,
वैसा ही झगड़ा बढ़ाने के लिये झगड़ालू होता है।
कानाफूसी करनेवाले के वचन,
स्वादिष्ट भोजन के समान भीतर उतर जाते हैं।
जैसा कोई चाँदी का पानी चढ़ाया हुआ मिट्टी का बर्तन हो,
वैसा ही बुरे मनवाले के प्रेम भरे वचन1 होते हैं।
जो बैरी बात से तो अपने को भोला बनाता है,
परन्तु अपने भीतर छल रखता है,
उसकी मीठी-मीठी बात पर विश्वास न करना,
क्योंकि उसके मन में सात घिनौनी वस्तुएँ रहती हैं;
चाहे उसका बैर छल के कारण छिप भी जाए,
तो भी उसकी बुराई सभा के बीच प्रगट हो जाएगी2।
जो गड्ढा खोदे, वही उसी में गिरेगा, और जो पत्थर लुढ़काए,
वह उलटकर उसी पर लुढ़क आएगा।
जिसने किसी को झूठी बातों से घायल किया हो वह उससे बैर रखता है,
और चिकनी चुपड़ी बात बोलनेवाला विनाश का कारण होता है।
Source notes (2)
- Footnote बुरे मनवाले के प्रेम भरे वचन: प्रेम के हार्दिक वचनों से चमकते होठों के साथ बुराई से भरा मन, भट्ठी से टूटे मिट्टी के बरतन के टुकड़े के समान हैं।
- Footnote बुराई सभा के बीच प्रगट हो जाएगी: अर्थात् आवश्यकता के समय ढोंगी मित्रता खुली शत्रुता में बदल जाएगी।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
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