इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019
योना 2
योना की प्रार्थना
तब योना ने महा मच्छ के पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना करके कहा,
“मैंने संकट में पड़े हुए यहोवा की दुहाई दी,
और उसने मेरी सुन ली है;
अधोलोक के उदर में से1 मैं चिल्ला उठा,
और तूने मेरी सुन ली।
तूने मुझे गहरे सागर में समुद्र की थाह तक डाल दिया;
और मैं धाराओं के बीच में पड़ा था,
तेरी सब तरंग और लहरें मेरे ऊपर से बह गईं।
तब मैंने कहा, ‘मैं तेरे सामने से निकाल दिया गया हूँ;
कैसे मैं तेरे पवित्र मन्दिर की ओर फिर ताकूँगा?’
मैं जल से यहाँ तक घिरा हुआ था कि मेरे प्राण निकले जाते थे;
गहरा सागर मेरे चारों ओर था, और मेरे सिर में सिवार लिपटा हुआ था।
मैं पहाड़ों की जड़ तक पहुँच गया था;
मैं सदा के लिये भूमि में बन्द हो गया था;
तो भी हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तूने मेरे प्राणों को गड्ढे में से उठाया है।
जब मैं मूर्छा खाने लगा, तब मैंने यहोवा को स्मरण किया;
और मेरी प्रार्थना तेरे पास वरन् तेरे पवित्र मन्दिर में पहुँच गई।
जो लोग धोखे की व्यर्थ वस्तुओं2 पर मन लगाते हैं,
वे अपने करुणानिधान को छोड़ देते हैं।
परन्तु मैं ऊँचे शब्द से धन्यवाद करके तुझे बलिदान चढ़ाऊँगा;
जो मन्नत मैंने मानी, उसको पूरी करूँगा।
उद्धार यहोवा ही से होता है।”
और यहोवा ने महा मच्छ को आज्ञा दी, और उसने योना को स्थल पर उगल दिया।
Source notes (2)
- Footnote अधोलोक के उदर में से: जल की गहराई अधोलोक के सदृश्य थी और वह मृतकों में गिना गया था।
- Footnote व्यर्थ वस्तुओं: अर्थात् मूर्तियाँ।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019. Copyright © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions. Licensed under CC BY-SA 4.0. Source: eBible.org. Typeset from the source files; no intended changes to scripture wording. BibleKenya is not endorsed by the rights holder.
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